राहु काल लगभग 90 मिनट की दैनिक अशुभ खिड़की है, जिसकी गणना वार + स्थानीय सूर्योदय से होती है। परंपरा कहती है इस स्लॉट में नया शुभ काम शुरू न करें — प्रॉपर्टी साइन, संस्कार यात्रा, व्यापार अनुष्ठान।
फिर भी कर सकते हैं: रिसर्च, लिस्टिंग देखना, घर लौटना, रूटीन काम। रोक मुख्यतः *शुरुआत* पर है।
घड़ी कैसे बनती है: दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) आठ बराबर भागों में बँटता है। हर वार राहु को अलग आठवाँ खंड देता है। साल भर सूर्योदय खिसकने से उसी वार की घड़ी बदलती है। यह प्रणाली रात का राहु काल नहीं मानती — खिड़की दिन की है।
शहर मायने रखता है: सूर्योदय अक्षांश/देशांतर से बदलता है, इसलिए मुंबई और दिल्ली का राहु काल एक जैसा नहीं। साइन से पहले शहर वाला पृष्ठ देखें। 15 मिनट की चूक रजिस्ट्री को गलत तरफ कर सकती है।
राहु काल बनाम यमगंड/गुलिक: कुछ पंचांग यमगंड और गुलिक भी देते हैं। ShubhHaiKya दैनिक स्कोर में राहु काल को “शुरू न करें” खिड़की और अभिजित को संतुलन मानता है। पुरोहित यमगंड भी टाले तो उसे स्कोर के ऊपर अतिरिक्त नियम समझें।
यात्रा अपवाद: दफ़्तर की नियमित आवाजाही तीर्थ/बारात की शुरुआत नहीं। राहु काल को संस्कार प्रस्थान और दस्तावेज़ पर सख्ती से लगाएँ, साधारण ऑफिस यात्रा न रोकें।